यूपी की सियासत में आज एक ऐसा धमाका हुआ है जिसने SIR को लेकर चल रही पूरी बहस को नया मोड़ दे दिया है। सिराथू की विधायक और अपना दल कमेरावादी की राष्ट्रीय अध्यक्ष पल्लवी पटेल ने साफ, तेज और तड़ाकेदार एलान कर दिया— “मैं SIR फॉर्म नहीं भरूंगी!” हाँ, आपने सही सुना… न भरूंगी, और भरने का कोई सवाल ही नहीं। गोंडा में पत्रकारों से बात करते हुए पल्लवी पटेल ने सरकार की पूरी SIR प्रक्रिया पर सीधा सवाल दाग दिया—कहा कि मैं जिंदगी भर वोट देती रही, मेरे पास हर वैलिड दस्तावेज मौजूद हैं, तो अब अचानक ये नया फॉर्म भरने की मजबूरी क्यों? क्या लोकतंत्र किसी नए कागज से तय होगा?
उन्होंने मतदाताओं से भी खुलकर अपील की—“अगर आपको समझ आता है तो भरिए, नहीं तो मत भरिए।” और इसी बयान के साथ उन्होंने SIR को ‘सरकार का जुमला’ बता दिया। पल्लवी पटेल ने कहा कि महिला आरक्षण की तरह SIR भी कागज़ों में रहेगा, जमीन पर नहीं उतरेगा, और अगर मैंने फॉर्म नहीं भरा तो क्या मेरा नाम काट देंगे? किस आधार पर? कौन-सा नियम कहता है कि नागरिकता का प्रमाण एक नए फॉर्म से होगा? उन्होंने SIR को सरकार का लोकतंत्र पर हमला तक बता दिया।
यही नहीं, उन्होंने SIR में लगी ‘जमीनी टीम’—बीएलओ पर डाले जा रहे प्रेशर को अमानवीय बताया और कहा कि ये पूरा सिस्टम सिर्फ राजनीतिक टाइमिंग पर सेट है—जहाँ चुनाव चाहिए, वहाँ SIR; जहाँ सत्ता को बढ़त चाहिए, वहाँ प्रक्रिया तेज। और जब उनसे योगी सरकार के डिटेंशन सेंटर वाले आदेश पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने फिर सरकार की मंशा पर वार किया—कहते हुए कि अगर डिटेंशन सेंटर बना रहे हैं तो उसका आधार क्या है? इसमें कौन आएगा? किस नियम पर आएगा? और प्लान B क्या है? ये सवाल सरकार को पहले जवाब देने होंगे।
पल्लवी पटेल का ये बयान सिर्फ विरोध नहीं… ये SIR की बहस में सबसे बड़ा धमाका है, जिसने पूरा माहौल गरमा दिया है—और अब यूपी में SIR सिर्फ एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सीधा राजनीतिक रण बन चुका है।
रिपोर्टर – सुमित शर्मा सैम टीवी

