बिहार में सरकार बदलते ही जिस आंधी का वादा किया गया था, अब वो आंधी नहीं… तूफान बनकर उठ चुकी है. पटना एयरपोर्ट से निकलते हुए डीजीपी विनय कुमार ने जो बयान दिया, उसने पूरे माफिया जगत की रूह कँपा दी—“राज खत्म होगा… और इस बार पूरी जड़ से उखाड़ फेंका जाएगा.” ये सिर्फ चेतावनी नहीं थी, ये उस ऑपरेशन की शुरुआत थी जिसकी आहट पिछले कई सालों में किसी ने नहीं सुनी थी.
पहली सूची—400 माफिया. फाइलें तैयार, सबूत पक्के, कोर्ट के आदेश का इंतज़ार. इनमें कोई साधारण नाम नहीं… जमीन गटकने वाले भू-माफिया से लेकर करोड़ों का काला सोना बेचने वाले बालू माफिया तक. वो चेहरे जो सालों से सत्ता की छाँव में पलते रहे… आज पहली बार पूरी तरह निशाने पर हैं. और डराने वाली बात ये कि ये तो सिर्फ शुरुआत है. दूसरी लिस्ट तैयार हो चुकी है—1208 नाम! इतनी बड़ी लिस्ट कि एक-एक नंबर पर एक पूरा गैंग बिखरा पड़ा है. सरकार जिस अंदाज़ में फ़ाइलें कोर्ट में ठोक रही है, उसका मतलब साफ है—अब पावर कोई ढाल नहीं, अब रुतबा कोई बचाव नहीं.
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. बिहार में ईव-टीजिंग पर जिस प्रकार एक नया मॉडल लागू किया जा रहा है—2000 स्कूटी खरीदकर स्कूल-कॉलेज के बाहर महिला सुरक्षा की नई ब्रिगेड खड़ी की जा रही है—ये बताता है कि सरकार सिर्फ माफिया ही नहीं, समाज के हर उस वायरस पर निशाना साधने जा रही है जो बिहार की छवि को सालों से कलंकित करता रहा है.
डीजीपी का एक वाक्य पूरे माहौल को काटता हुआ निकल गया—“जो करना होगा, करेंगे… और किसी को बख्शेंगे नहीं.” ये सुनकर माफिया जगत में सन्नाटा है, लेकिन आम लोगों में उम्मीद की वो चमक दिखाई दे रही है जो कानून-व्यवस्था में लंबे समय बाद लौट रही है. बिहार आज पहली बार कह रहा है—अब खेल बदलने वाला नहीं, खेल बदल चुका है. सरकार के टेबल पर फाइलें नहीं, अब हथौड़ा रखा है… और जिन 1608 माफियाओं के नाम दर्ज हो चुके हैं, उन्हें अब बस एक चीज का इंतज़ार है— COURT का आदेश और संपत्ति पर सरकार की सील.ये सिर्फ कार्रवाई नहीं… ये बिहार में माफियाराज की काउंटडाउन क्लॉक शुरू होने का एलान है.
रिपोर्ट – डी के त्रिपाठी सैम टीवी डिजिटल

