‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर अब विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर भी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस के लगाए जा रहे आरोपों से खुद को अलग कर लिया है और साफ शब्दों में कह दिया है कि *INDIA गठबंधन का इससे कोई लेना-देना नहीं है।*
दरअसल, कांग्रेस ने हाल ही में दिल्ली में ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली निकालकर बीजेपी और चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। कांग्रेस का दावा है कि सत्ताधारी पार्टी वोटर लिस्ट में हेरफेर कर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस देशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा करने की कोशिश में है और छह करोड़ लोगों के हस्ताक्षर जुटाने का दावा भी कर रही है।
लेकिन अब उमर अब्दुल्ला ने इस पूरे अभियान से दूरी बनाते हुए बड़ा बयान दे दिया है। उन्होंने कहा कि *हर पार्टी को अपने मुद्दे तय करने की आज़ादी है। कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ और SIR को अपना मुद्दा बनाया है, लेकिन INDIA गठबंधन को इससे जोड़ना गलत है।* उमर ने साफ कर दिया कि गठबंधन का मतलब यह नहीं कि हर दल हर मुद्दे पर एक जैसी लाइन ले।
उमर अब्दुल्ला का यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि नेशनल कॉन्फ्रेंस INDIA गठबंधन की एक महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी है। कांग्रेस भले ही लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हो, लेकिन यह बयान दिखाता है कि गठबंधन के भीतर सब कुछ एक सुर में नहीं चल रहा।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान विपक्षी एकता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जहां कांग्रेस ‘वोट चोरी’ को लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बता रही है, वहीं उमर अब्दुल्ला का रुख बताता है कि सभी सहयोगी दल इस मुद्दे को लेकर सहज नहीं हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या INDIA गठबंधन आने वाले समय में हर मुद्दे पर बिखरी रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा?
या फिर चुनाव से पहले कोई साझा लाइन तय होगी?
फिलहाल इतना साफ है कि *‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर विपक्ष के भीतर ही दरार की तस्वीर अब खुलकर सामने आ चुकी है*, और इसका सियासी असर आने वाले दिनों में और गहराने वाला है।
रिपोर्ट – सुमित शर्मा

