दोस्तों… पकड़ कर बैठ जाइए, क्योंकि लोकसभा के अंदर आज अखिलेश यादव ने ऐसा धमाका किया है कि उसकी गूंज सीधे लखनऊ से लेकर दिल्ली की सियासत तक सुनाई दे रही है!**
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा चल रही थी… लेकिन अखिलेश यादव ने इस बहस को सीधे *सत्ता पक्ष की राजनीति पर सर्जिकल स्ट्राइक* में बदल दिया। उन्होंने कहा— *“जो महापुरुष आपके नहीं हैं, आप उन्हें भी ओन करने में लगे हैं… इतिहास खंगाल लीजिए, कभी चुनाव मंचों पर बाबा साहेब की तस्वीर नहीं लगाई, और जिस दिन सपा-बसपा ने मिलकर आपको हराया… उसी दिन से आपने बाबा साहेब को याद करना शुरू कर दिया!”
अब बड़ा सवाल— क्या मायावती इस बयान से खुश होंगी या नाराज़?
क्योंकि अखिलेश ने पहली बार खुले मंच से कहा कि सपा और बसपा की एकजुटता ने ही BJP को झुकने पर मजबूर किया था। यह बात बसपा सुप्रीमो के दिल को भी छू सकती है… और चुभ भी सकती है। क्योंकि सपा-बसपा गठबंधन का श्रेय कौन ले—that’s the political flashpoint.अखिलेश यहीं नहीं रुके… उन्होंने सत्ता पक्ष को “राष्ट्रवादी नहीं, राष्ट्र-विवादी” करार दिया। कहा— “वंदे मातरम् जिसने देश को जोड़ा… आज वही लोग इसे बांटने की कोशिश कर रहे हैं। जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई में हिस्सा तक नहीं लिया… वह वंदे मातरम् का असली महत्व क्या समझेंगे?”*
इसके बाद उन्होंने यूपी का नाम लेते हुए कहा—
“उत्तर प्रदेश के लोगों ने कम्युनल पॉलिटिक्स के अंत की शुरुआत कर दी है… जहां से इन्होंने शुरुआत की थी, वहीं से इसे खत्म करेंगे!”अखिलेश का बयान सिर्फ एक भाषण नहीं… एक सीधा सियासी मैसेज था—कि आने वाले दिनों में बीजेपी का असली मुकाबला फिर उसी ‘सपा-बसपा इफेक्ट’ से हो सकता है…और मायावती इस संकेत को कैसे लेती हैं—यही यूपी की अगली सबसे बड़ी कहानी बनेगी!
ब्यूरो रिपोट – सुमित शर्मा

