दोस्तों नमस्कार… यूपी में उस नाम की गूंज फिर सुनी गई है, जिसे खत्म करने का दावा किया गया था—अतीक अहमद। लेकिन इस बार कहानी उसके छोटे बेटे अबान की है, जिसकी एक 30 सेकंड की रील ने पुलिस, राजनीति और सोशल मीडिया में नया तूफान खड़ा कर दिया है। धूमनगंज थाने की पुलिस ने खुद संज्ञान लेते हुए अबान अहमद, उसके साथी हमजा और एक अज्ञात व्यक्ति पर भड़काऊ रील डालने, दहशत फैलाने और गलत संदेश देने के आरोप में BNS की धारा 353 के तहत FIR दर्ज कर दी है।
दो दिन पहले अबान एक शादी समारोह में गया था और वहीं किसी ने उसके साथ धमकी भरे डायलॉग जोड़कर एक रील बना दी, जिसे सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल किया गया। रील में अतीक अहमद का बेटा बिल्कुल अलग अंदाज में नजर आता है—काफिले के बीच, डिनर टेबल पर लोगों के साथ, और बैकग्राउंड में चलता डायलॉग माहौल को और ज्यादा विवादित बनाता है—“औकात सामने वाला दिखाएगा, हम दिल भी रखते हैं और असलहा भी… हम पीछे नहीं, सामने से दहाड़ते हैं… तूफान और हम जब भी आते हैं, फाड़ के जाते हैं।” इस डायलॉग ने पूरे मामले को और ज्यादा सनसनीखेज बना दिया है।
सबसे बड़ा सवाल पुलिस के सामने यही है कि—जबकि अबान को सुरक्षा दी गई थी, तो वह बिना सुरक्षा कर्मियों के कैसे घूम रहा था? किसने रील शूट की? किसने एडिट की? और किस मकसद से इसे वायरल किया गया? पुलिस ये भी जांच कर रही है कि वीडियो कब, कहाँ और किसके बीच बनाया गया, क्योंकि FIR की कॉपी में जगह का कोई जिक्र नहीं है।
याद दिला दें—उमेश पाल और दो सरकारी गनरों की हत्या के ठीक बाद अबान और उसके भाई अहजम, कसारी–मसारी इलाके में लावारिस हालत में मिले थे, जिन्हें बाल सुधार गृह भेजा गया था। बाद में 9 अक्टूबर 2023 को अदालत के आदेश पर दोनों को रिहा किया गया और उनकी कस्टडी उनकी बुआ परवीन कुरैशी को सौंप दी गई। तब से दोनों हटवा में रह रहे हैं और पुलिस द्वारा सुरक्षा भी दी गई थी।
लेकिन आज का मामला उन सारे पन्नों को फिर खोल देता है, जिन पर “अतीक अहमद गैंग” का नाम लिखा है—15 अप्रैल 2023 को अतीक और उसका भाई अशरफ पुलिस कस्टडी में मारे गए, 13 अप्रैल को असद एनकाउंटर में ढेर हुआ, बड़ा बेटा उमर लखनऊ जेल में, दूसरा बेटा अली झांसी जेल में, और पत्नी शाइस्ता परवीन व अन्य परिवारजन इनामी होकर फरार। ऐसा लग रहा था कि कहानी खत्म हो चुकी है… लेकिन अबान की ये वायरल रील मानो उस बंद किताब का एक नया पन्ना खुद-ब-खुद खुल गया हो।
UP पुलिस अब इस केस को “सोशल मीडिया के जरिए दहशत फैलाने” की श्रेणी में गंभीरता से लेकर आगे की जांच में जुट चुकी है। और आज का बड़ा सवाल यही—क्या ये सिर्फ एक रील थी? या गैंग के बिखरे हुए चेहरों को फिर से चमकाने की कोशिश? या किसी तीसरे पक्ष की ओर से की गई साजिश? यूपी की सियासत और क्राइम वर्ल्ड दोनों इस नए अपडेट पर कड़ी नजरें गड़ाए बैठे हैं।
सुमित शर्मा

