आज का दिन सिर्फ खेल का नहीं, गर्व और गौरव का दिन है। वो बेटियाँ, जिन्हें कभी कहा गया था “घर संभालो”, आज पूरे देश का मान संभाल रही हैं! भारत की महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया है, और पहली बार विमेंस वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर पूरी दुनिया को बता दिया है — “अब बेटियाँ किसी से कम नहीं!”
फाइनल मुकाबले में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर सुनहरा इतिहास लिखा। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारतीय टीम ने 298 रन का पहाड़ खड़ा किया, और जवाब में साउथ अफ्रीका की टीम 246 पर सिमट गई। स्टेडियम में तिरंगा लहराया, आंखों में खुशी के आंसू और दिल में सिर्फ एक आवाज़ — “भारत माता की जय!”
मैच की असली शेरनियाँ बनीं शैफाली वर्मा, जिन्होंने तूफानी 87 रन ठोके, और दीप्ति शर्मा, जिन्होंने पहले बल्ले से 58 रन बनाए और फिर गेंद से पाँच विकेट लेकर पूरे मैच का रुख पलट दिया। कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कप्तानी की मिसाल पेश करते हुए टीम को वो आत्मविश्वास दिया, जिसने हर खिलाड़ी के दिल में जीत का यकीन भर दिया।
ये जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, ये उन करोड़ों बेटियों का जवाब है जिन्हें कहा गया था — “ये तुम्हारा मैदान नहीं।” आज उन्होंने साबित कर दिया कि जुनून और जज़्बे के सामने कोई फर्क मायने नहीं रखता। आज ये बेटियाँ सिर्फ घर नहीं, पूरा देश संभाल रही हैं।
ये जीत हर उस माँ की मुस्कान, हर उस पिता के गर्व, और हर उस बेटी के सपने की जीत है जिसने कभी हार नहीं मानी। भारत की Women in Blue ने आज दुनिया को बता दिया — “हम मैदान में भी जीतते हैं, और दिलों में भी!”
सैम टीवी रानो गुप्ता सैम टीवी डिजिटल

