बिहार चुनावी माहौल में जब हर तरफ राजनीतिक बयानबाज़ी और वादों की गूंज है, उसी बीच एक ऐसा नाम फिर से सामने आया है जिसने कभी पहाड़ काटकर इंसानियत की मिसाल पेश की थी — *‘माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी।* अब उनके बेटे *भागीरथ मांझी* ने सियासी हलचल के बीच बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा — “नीतीश कुमार ने मेरे पिता को पहचान दिलाई, राहुल गांधी तो हाल में मिले हैं।” भागीरथ मांझी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हीं की वजह से उनके पिता के संघर्ष और काम को लोगों ने जाना, सम्मान दिया और दुनिया के सामने पहचान मिली। मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार ही वो नेता हैं जिन्होंने सबसे पहले उनके पिता के उस काम को स्वीकार किया और राज्य स्तर पर सम्मान दिलाया।
वहीं, भागीरथ मांझी ने कांग्रेस नेता *राहुल गांधी* से अपनी मुलाकात को याद करते हुए बताया कि राहुल गांधी ने उनके परिवार के लिए एक पक्का घर बनवाया, जिसमें चार बेडरूम, एक बाथरूम और एक किचन है। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने वादा करने के बावजूद उन्हें टिकट नहीं दिया। मांझी बोले — “मैंने राहुल गांधी से कहा था कि अगर टिकट नहीं मिला तो आलोचना झेलनी पड़ेगी, क्योंकि कांग्रेस का साथ देने के लिए मुझे भी डांट सुननी पड़ेगी।” उन्होंने बताया कि राहुल गांधी उनके घर आए, उनके पलंग पर बैठे और नारियल पानी पिया। पर जब बात चुनावी मौके की आई, तो वादा अधूरा रह गया।
यह वही दशरथ मांझी की कहानी है जिनकी जिद और जज़्बे ने पूरे देश को झकझोर दिया था जिन्होंने अपनी पत्नी की मौत के बाद अकेले 22 साल तक छैनी और हथौड़े से पहाड़ काटकर सड़क बना दी थी। उनके इस साहस ने यह साबित कर दिया था कि अगर इरादा मजबूत हो तो कोई भी पहाड़ इंसान के हौसले को नहीं रोक सकता। और आज, उनके बेटे का बयान फिर से याद दिलाता है कि असली पहचान वो होती है जो कर्म से मिलती है, न कि केवल वादों से।

