दोस्तों… संसद के भीतर वंदे मातरम् पर चल रही ऐतिहासिक बहस ने आज सियासत की दिशा ही बदल दी, और इसके केंद्र में थे देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह। प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया—“वंदे मातरम् पर बहस की क्या ज़रूरत?”, और राजनाथ सिंह ने उसी संसद में खड़े होकर ऐसा जवाब दिया कि पूरा सदन सन्न हो गया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, एक ऐसे दौर का प्रतिरोध है जिसने अंग्रेजी सत्ता की जड़ें हिला दी थीं। बंगाल विभाजन के समय यह गीत ऐसी आग बनकर फैला कि ब्रिटिश सरकार डर के मारे सर्कुलर निकाल बैठी, लेकिन जनता रुकी नहीं—यह आवाज़ धरती से आसमान तक गूंजती रही।
राजनाथ सिंह ने तंज कसा कि जिस गीत ने आज़ादी के आंदोलन को दिशा दी, उसी गीत को आज़ादी के बाद कांग्रेस ने हाशिये पर डाल दिया। उन्होंने 1937 में कांग्रेस द्वारा गीत को “खंडित” करने के फैसले को देश के साथ हुआ ऐतिहासिक अन्याय बताया। बोले—जिसे राष्ट्रगान जितना सम्मान मिलना चाहिए था, उसे तुष्टीकरण की राजनीति ने कमजोर करने की साज़िश की।
राजनाथ सिंह ने कहा कि वंदे मातरम् और जन गण मन दो प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि मां भारती की दो आंखें हैं—दोनों भारतीय आत्मा की दो धड़कनें हैं। लेकिन कुछ लोग दोनों को लड़ाने का नैरेटिव बना रहे हैं, क्योंकि वो भारत को जिन्ना की आंखों से देखते हैं। उन्होंने कहा कि जिनको भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परंपराओं की सूक्ष्मता समझ ही नहीं आती, उन्हें वंदे मातरम् सांप्रदायिक लगता है, आनंदमठ विवादास्पद लगता है, और मां भारती की पूजा उन्हें ‘मूर्ति पूजा’ दिखाई देती है। जबकि यह गीत किसी धर्म विशेष के खिलाफ कभी था ही नहीं—
यह राष्ट्र की आत्मा का प्रतीक था और रहेगा। राजनाथ ने इसके बाद कांग्रेस पर सीधा वार किया—कहा कि आज देश जिन चुनौतियों से गुज़रा है, विभाजन से लेकर नक्सलवाद तक, उसके बीज भी तुष्टीकरण की राजनीति में छिपे थे। वहीं पीएम मोदी के नेतृत्व में लेफ्ट उग्रवाद खत्म होने की ओर है, और देश भीतर से अधिक सक्षम और सुरक्षित बन रहा है। उन्होंने बंगाल के पतन, घुसपैठ, हिंसा, और सांस्कृतिक हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस जमीन से राष्ट्रवाद की गूंज उठी थी, आज वही जमीन वैचारिक अराजकता में झुलस रही है—और यही समय है गलतियों को सुधारने का।
अंत में उन्होंने कहा कि यह वर्षगांठ केवल उत्सव नहीं, बल्कि प्रण है—वंदे मातरम् के सम्मान को उसके सही स्थान पर वापस ले जाने का। क्योंकि इस गीत की कहानी भारत की कहानी है, और इसकी गरिमा लौटाना इतिहास से लेकर भविष्य तक, हर पीढ़ी के लिए ज़रूरी है।
ब्यूरो रिपोर्ट सुमित शर्मा

