फिरोज़ाबाद से ऐसी कहानी सामने आई है जिसे सुनकर रूह कांप जाए, क्योंकि यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, बल्कि भरोसे में छिपा वह ज़हर है जो किसी की पूरी जिंदगी निगल सकता है। SIR… यानी मतदाता सूची पुनरीक्षण की आड़ में एक भाई ने अपनी ही बहन की पूरी दुनिया उजाड़ दी। डराने की भाषा थी—“फॉर्म नहीं भरा तो देश से बाहर फेंक दिए जाओगे, बाहर निकाल दिए जाओगे”… और इस डर की कीमत एक महिला ने अपने मकान, अपनी दुकान, अपनी पूरी कमाई से चुकाई—वो भी धोखे से। गुरुग्राम में सिलाई करके अपनी जिंदगी खड़ी करने वाली सरताज खानम को पता भी नहीं था कि उसके अपने घर में ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन छुपा है। भाई ने SIR का खौफ दिखाया, कहा जांच चल रही है, फॉर्म नहीं भरा तो नागरिकता भी खतरे में पड़ सकती है—बस यहीं से खेल शुरू हुआ। सरताज डर गई… और डर वही चाबी थी जिससे भाई ने उसकी पूरी जिंदगी का ताला खोल लिया।
फिरोज़ाबाद लाकर उसे तहसील में खड़ा कर दिया गया—कहा “कागज़ अपडेट कराने हैं”… लेकिन अपडेट नहीं, उसकी पूरी संपत्ति अपडेट होकर किसी और के नाम चढ़ रही थी। दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर कराए गए, पूछा गया—“क्या आप मकान और दुकान गिफ्ट कर रही हैं?”… लेकिन जब आप अनपढ़ हों, जब शब्दों का मतलब न समझ सकें और आपके सामने खड़ा शख्स आपका भाई हो… तब सवाल नहीं उठता, भरोसा उठता है—और सरताज ने वही भरोसा दिखाया। एक पल में उसके हस्ताक्षर उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती बन गए, क्योंकि ये SIR फॉर्म नहीं… यह तो उसकी मेहनत की कमाई का पूरा बैनामा था जो भाई के नाम ट्रांसफर हो चुका था।
जब सच पता चला, उसने विरोध किया—तो भाई ने धमकी दी “जान से खत्म कर दूंगा”… और यहीं से कहानी इंसानी रिश्तों की क्रूर सच्चाई बन गई। एक महिला जिसने ज़िंदगीभर पाई-पाई जोड़कर अपना घर बसाया, उसने एसएसपी को चिट्ठी भेजी, अदालत में गुहार लगाई… और अब इंसाफ की उम्मीद में दर-दर भटक रही है। यह सिर्फ एक केस नहीं है—यह चेतावनी है कि कैसे SIR के नाम पर, सरकारी प्रक्रिया के नाम पर, डर के नाम पर, अनपढ़ता के नाम पर लोग ठगे जा रहे हैं… और अपराधी वही हैं जिन्हें घर में सबसे भरोसेमंद माना जाता है।
फिरोज़ाबाद की ये घटना इस बात का सबूत है कि असली खतरा फॉर्म नहीं, बल्कि वो लोग हैं जो फॉर्म का डर बनाकर आपके जीवनभर की पूँजी चुरा लेते हैं। पुलिस जांच में जुटी है… लेकिन सरताज खानम के शब्द आज भी हवा में तैर रहे हैं—“मैं अनपढ़ हूं, कागज़ का मतलब नहीं समझ सकी… और उसने धोखे से सब कुछ छीन लिया।” ये सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, यह एक चेतावनी है—डर से बड़ी कोई धोखाधड़ी नहीं होती।
रिपोर्टर – सुमित शर्मा सैम टीवी

