गोरखनाथ मंदिर का शांत परिसर, सुबह की हल्की धूप, और कुर्सियों पर बैठे सैकड़ों चेहरे—किसी की आंख में चिंता, किसी के माथे पर दर्द, और किसी की हथेलियों में अस्पतालों की रिपोर्टें। लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सभागार में प्रवेश करते हैं, माहौल बदल जाता है… लोग उठकर नहीं खड़े होते, लेकिन उम्मीद जरूर खड़ी हो जाती है। जनसाधारण में बैठी हर आवाज का सिर्फ एक ही सहारा—कि शायद आज उनकी जिंदगी बचाने वाला कोई फैसला हो जाए। इसी भरोसे को सच करते हुए योगी आदित्यनाथ एक-एक पीड़ित के पास पहुंचते हैं, रिपोर्ट देखते हैं, और सबसे पहले एक ही वाक्य कहते हैं—“इलाज रुकना नहीं चाहिए… पैसे की चिंता आप मत करें, सरकार करेगी।” यह सिर्फ वादा नहीं, कई घरों की टूटती सांसों को वापस लौटाने वाली ताकत है।
सबसे मार्मिक पल तब आता है जब एक छोटी बच्ची अपनी मां के इलाज की फाइल लेकर कांपते हाथों से सीएम के सामने खड़ी होती है। बच्ची की आवाज धीमी है, लेकिन उसकी आंखों में अपनी मां को बचाने की लड़ाई साफ दिखती है। योगी फाइल उठाते हैं, बच्ची का सिर सहलाते हैं और कहते हैं—“तुम चिंता मत करो… तुम्हारी मां का इलाज सरकार कराएगी। पैसा तुम्हारी पढ़ाई में रुकावट न बनेगा, इलाज में कभी नहीं।” बच्चे की आंख में आई चमक किसी भी आदेश से बड़ा प्रभाव छोड़ती है।
इसके बाद शुरू होती है उस जनता दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया—जहां मुख्यमंत्री हर कागज, हर शिकायत, हर समस्या को देखते हुए अधिकारियों को साफ निर्देश देते हैं: “जो बीमार है, उसका इलाज तुरंत शुरू हो; जिसको आर्थिक मदद चाहिए, उसका इस्टीमेट विलंब के बिना शासन को भेजा जाए; कोई परिवार पैसों के कारण अस्पताल से वापस न लौटे… सरकार के विवेकाधीन कोष से पूरा खर्च दिया जाएगा।”
आज के जनता दर्शन में सिर्फ इलाज की फाइलें नहीं थीं—किसी की जमीन पर कब्जा था, किसी पर दबंगई का अत्याचार, कोई योजनाओं से वंचित था। योगी आदित्यनाथ हर समस्या को सुनकर अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के आदेश देते हैं—“दबंगई हो तो सख्त कानूनी कार्रवाई करो, परिवारिक विवाद हो तो दोनों पक्षों को बैठाकर समझाओ, और योजनाओं का लाभ किसी तक रुके बिना पहुँचे… शासन लोगों के द्वार तक पहुँचना चाहिए।”
यह जनता दर्शन सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था—ये उन लोगों की कहानी थी जिनके पास न पैसे हैं, न पहुंच, न परिचय… लेकिन उनके पास एक भरोसा है कि जब वे यहां आए हैं, उनकी आवाज शासन के सबसे ऊंचे दरवाजे पर पहुंच चुकी है। और सीएम योगी आदित्यनाथ का संदेश आज बिल्कुल साफ था—“कोई बीमार हो, गरीबी से परेशान हो, दबंगों से घिरा हो… सरकार उसका ढाल बनेगी। इलाज, सुरक्षा, मदद—सबकी जिम्मेदारी हमारी है।”गोरखनाथ मंदिर की सीढ़ियों से बाहर जाते हुए लोग आज सिर्फ फाइलें लेकर नहीं गए… वे उम्मीद लेकर गए कि उनकी लड़ाई अब अकेली नहीं है।
रिपोर्ट – आकांक्षा मिश्रा

